मैं कौन हू?
मैं एक मनुष्य हूं, काम मेरी प़्कति है, मैं कामदर्शी हूं, कामदर्शी होना मनुष्य का स्वभाव है, इसे वह साथ लेकर ही जन्मता है, बल्कि इसका जन्म ही काम का परिणाम है, काम सुन्दर है, काम सार्थक है, क्यूंकि हम उसी की वजह से है, पशु पक्षि और पेड पोधे भी उसी की वजह से हैं, ध्रति का सुन्दरता काम से है, काम शक्ति है काम उर्जा है, जगत का व्यापार इसी से चलायमान है, ध़ति पर स्वर्ग के सुख और आन्न्द की प्राप्ति केवल काम द्वारा ही संभव है, काम के दुरूपयोग से ही ध्रति आज नर्क बन गई है, इस नर्क से मुक्ति के लिए काम की उर्जा के सही प्रयोग को जानना बहुत जरूरी है,
ताज भारत की शान है तो खजूराहो भी विश्व में भारत की पहचान है
भारत महान है क्यूंकि काम के प्रभाव को सर्व प्रथम भारत के ज्ञानियों ने ही जाना है और फिर उन्होंने ही उसका उददेश्य और उसके नियम निश्चिंत किए उनकी यह महान खोज बाद में जन्मे विकारों तले दब गईा
उतक़ष्ट को निकृष्ट से कैसे अलग किया जाये घ् घ् यह एक बडी समस्या है सो यह उचित जाना कि भारतीय साहित्य में जहां तहां बिखरे काम संबंधि विचारों को एकत्र करके कामदर्शी पाठकों के सामने रख दिया जाये और उचित और अनुचित का विचार भी उन्हीं पर छोड दिया जाएा
उचित सत्य को गृहण करें तथा अनुचित आचार विचार का त्याग करें, काम संबंधि प्राचीन साहित्य के पुनर्वलोकलन का हेतु यही है,
आज सारी दुनिया कामातुर है , काम उर्जा का सही और संतुलित प्रयोग सिखाकर भारत मानवता की रक्षा कर सकता है, विश्व गुरू बनने का यह सर्वोत्तम उपाय है, काम की बात यही है,
ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग भी आपके जीवनसाथी के तनमन की गहराईयों से होकर गुज़रता है, ईश्वर से जुडने का सरल उपाय है उसके भक्त से जुडना, संभोग से योग सहज ही सिद्ध होता है,
संभोग से शरीर तृप्त , मन प्रफुल्लित और आत्मा आनंदित होती है,
आनन्द को ठुकराने वाले से अभागा, इस जगत में दूसरा कोई नहीं, काम को जानना मनुष्य का मुख्य कर्तव्य है,
ईश्वर आपकी कामांगणी को सदा प्रजवलित रखे,
कामदर्शी